
रायपुर: 65 एकड़ में फैला इंदिरा स्मृति उद्यान बदहाली की कगार पर, विकास के दावों के बीच व्यवस्था पर उठे सवाल**
रायपुर। दलदल सिवनी स्थित कुशाभाऊ ठाकरे वार्ड क्रमांक-7 का इंदिरा स्मृति उद्यान एक बार फिर चर्चा में है। करीब 65 एकड़ क्षेत्र में फैले इस विशाल उद्यान की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी दिखाई दे रही है। आरोप है कि शासन-प्रशासन की उदासीनता के चलते कभी शहर के प्रमुख हरित क्षेत्रों में गिने जाने वाला यह उद्यान अब धीरे-धीरे बर्बादी की ओर बढ़ रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, सुबह के समय उद्यान का बड़ा हिस्सा मवेशियों के चारागाह के रूप में नजर आता है। वहीं दोपहर के समय यहां असामाजिक गतिविधियों की शिकायतें सामने आती हैं और रात होते-होते यह स्थान नशा करने वालों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन जाता है। पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण उद्यान की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
बताया जाता है कि इंदिरा स्मृति उद्यान पहले वन विभाग के अधीन था, लेकिन फिलहाल इसकी जिम्मेदारी नगर निगम के पास है। इसके बावजूद इतने बड़े भू-भाग वाले इस उद्यान के समुचित रखरखाव और विकास की दिशा में अपेक्षित काम नजर नहीं आ रहा है। सुविधाओं का इंतजार उद्यान में आने वाले लोगों को सुरक्षा व्यवस्था, पर्याप्त टॉयलेट, बैठने के लिए कुर्सियां और बेहतर रखरखाव जैसी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इतने बड़े क्षेत्र को व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाए तो यह रायपुर के लिए एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल बन सकता है।
ऑक्सीजोन की तर्ज पर हो सकता है विकास
लोगों का कहना है कि अगर शासन और नगर निगम इच्छाशक्ति के साथ योजना बनाए तो **इंदिरा स्मृति उद्यान को ऑक्सीजोन की तर्ज पर विकसित किया जा सकता है।** यहां हरियाली को संरक्षित करते हुए वॉकिंग ट्रैक, बैठने की व्यवस्था, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा, बच्चों के लिए सुविधाएं और बेहतर लैंडस्केपिंग विकसित की जा सकती है।
सवाल यह है कि 65 एकड़ जैसे विशाल क्षेत्र की क्षमता का इस्तेमाल आखिर कब होगा? वर्षों से विकास और सुविधाओं को लेकर दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव की रफ्तार बेहद धीमी दिखाई देती है।स्थानीय नागरिकों की मांग है कि शासन और नगर निगम उद्यान की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कर **ठोस विकास योजना और नियमित निगरानी व्यवस्था** लागू करें। क्योंकि संसाधन और जमीन दोनों मौजूद हैं—जरूरत सिर्फ **नियत और संकल्प** की है।
