अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।
अमेरिका-ईरान तनाव से सप्लाई पर असर फारस की खाड़ी और ओमान सागर में बढ़ते सैन्य तनाव तथा ईरानी जहाजों और तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने से वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के आसपास तनाव बढ़ने से तेल परिवहन भी प्रभावित होने की आशंका है।
सऊदी अरब पर हमलों से बढ़ी चिंता वैकल्पिक तेल मार्गों और सऊदी अरब से जुड़े ठिकानों पर हमलों की खबरों ने बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार तेजी से देश का **तेल आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव** बढ़ सकता है। इससे महंगाई का जोखिम भी बढ़ेगा।**पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका**अगर क्रूड ऑयल लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर बना रहता है, तो घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर दबाव बढ़ सकता है। परिवहन लागत बढ़ने से इसका असर रोजमर्रा की कई वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ने की आशंका है।
👉 यानी पश्चिम एशिया का संकट जितना लंबा चलेगा, भारत के लिए तेल, रुपया और महंगाई—तीनों मोर्चों पर चुनौती उतनी ही बढ़ सकती है। #CrudeOil #BrentCrude #PetrolDiesel #OilPrice #IndiaEconomy #WestAsiaCrisis #Iran #USIran #Inflation #Rupee #BreakingNews
