Up।मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश **रवि कुमार दिवाकर** का एक फैसला इन दिनों चर्चा में है। दहेज हत्या के एक मामले में दोषी **नदीम को फांसी की सजा** सुनाते हुए जज ने अपने फैसले में न्यायिक स्वतंत्रता और सिद्धांतों को लेकर कड़े शब्दों का उल्लेख किया।
फैसले में जज दिवाकर ने लिखा कि मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलाना पसंद नहीं करूंगा।” उन्होंने कहा कि जब तक वह अपने सिद्धांतों पर चलते हुए न्यायिक सेवा कर सकते हैं, तब तक सेवा करते रहेंगे और यदि ऐसा संभव नहीं हुआ तो त्यागपत्र देना पसंद करेंगे।
माफिया-गैंगस्टर से धमकी का भी जिक्र जज ने फैसले में कथित तौर पर यह भी उल्लेख किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक माफिया/गैंगस्टर की ओर से उन्हें संदेश भिजवाया गया कि यदि वह उनके पीछे पड़े तो उनका जिले से बाहर तबादला करवाया जा सकता है।उन्होंने यह भी कहा कि जब तक वह जज की कुर्सी पर हैं, तब तक फैसला लेने का अधिकार उनका रहेगा।बताया गया है कि जज रवि कुमार दिवाकर ने पिछले पांच महीनों में 10 चर्चित मामलों में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। उनके इस रुख को लेकर न्यायिक क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है।
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