राजधानी रायपुर के कमिश्नरेट और ग्रामीण थाना क्षेत्रों से गुमशुदगी को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। शनिवार से रविवार के बीच महज 24 घंटे में कुल 159 गुमशुदगी की FIR दर्ज की गईं। इनमें अलग-अलग आयु वर्ग के लोग शामिल हैं
।पुलिस के दर्ज मामलों के अनुसार, 78 महिलाएं 54 वयस्क पुरुष**, **17 बच्चे एवं नाबालिग** तथा **10 बुजुर्ग** इस अवधि में लापता होने की शिकायतों में शामिल हैं।
महिलाओं की गुमशुदगी सबसे ज्यादा
159 मामलों में 78 महिलाएं शामिल हैं। यानी कुल मामलों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत है। इसके बाद **54 वयस्क पुरुषों की गुमशुदगी दर्ज हुई, जो कुल मामलों का करीब 34 प्रतिशत है।वहीं, 17 बच्चे और नाबालिग भी गुमशुदगी की सूची में शामिल हैं। इनकी हिस्सेदारी करीब 11 प्रतिशत है। इसके अलावा **10 बुजुर्गों** के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई, जो कुल मामलों का लगभग **6 प्रतिशत** है।
| श्रेणी | मामले || ————- | ——: || महिलाएं | 78 || वयस्क पुरुष | 54 || बच्चे/नाबालिग | 17 || बुजुर्ग | 10 || कुल | 159
हर घंटे औसतन 6 से ज्यादा गुमशुदगी के मामले24 घंटे में 159 FIR का मतलब है कि औसतन **हर घंटे करीब 6 से 7 गुमशुदगी के मामले** दर्ज हुए। हालांकि, यह आंकड़ा **FIR/शिकायतों की संख्या** को दर्शाता है; इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी लोग अब भी लापता हैं।
कई मामलों में पुलिस की तलाश के बाद व्यक्ति मिल भी सकते हैं। पुलिस के सामने बड़ी चुनौतीइतनी बड़ी संख्या में गुमशुदगी की शिकायतें पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण हैं। खासकर **बच्चों, नाबालिगों और बुजुर्गों** से जुड़े मामलों में पुलिस को प्राथमिकता के आधार पर तलाश करनी पड़ती है। मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज, परिजनों से पूछताछ और अन्य उपलब्ध तकनीकी माध्यमों से तलाश की जाती है।
महत्वपूर्ण बात: केवल 24 घंटे के आंकड़े के आधार पर गुमशुदगी के कारण या किसी विशेष वजह को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। इसके लिए पुलिस की विस्तृत जांच और आधिकारिक कारण सामने आना जरूरी है।
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